**** सन् 2030 और प्रदूषण****

**** सन् 2030 और प्रदूषण****
सज-धजकर निकल पड़ी दूल्हे की बारात
दूल्हे के पिता ने मन में ठान ली ये बात।
दुल्हन ही दहेज़ है, दहेज़ ना लेंगे आज
दुनिया के सामने मिसाल पेश करनी है आज ।
पूरी शादी हो चुकी विदाई की अब आई बारी,
दुल्हन के पिता ने भर कर रखे हैं बैग भारी-2।
बोले समधी जी ये बेटी के लिए तोहफे हैं,
आप इस छोटी भेंट को दहेज़ न समझें।
बोले पिता दूल्हे के, मैने तो यह है ठाना,
दुल्हन के सिवाय कुछ नहीं ले जाना।
बात सुन दुल्हन के पिता यूँ प्रफुल्लित हुये,
समझ रहे जैसे, भगवान आज मिल गये।
फिर सोचकर बोले हमें तो बेटी की खुश चाहिये,
बेटी हमारी जहाँ जाये लम्बी आयु पाये।
इसलिये दीर्घायु के आशीष से पहले,
ऑक्सीजन सिलिंडरों से बैग भरवाये।
बिन हवा कैसे जी पायेगी मेरी बच्ची,
दूषित हवा में साँस लेना मुश्किल, बात ये सच्ची।
इस उम्र में पाप न यह करना चाहूँ,
पाप करके गंगा नहाने भी कहाँ जाऊँ?
अब तो गंगोत्री ग्लेशियर भी सूख चुका।
इस बात ने लड़के के पिता को यूँ छुआ।
ऑक्सीजन सिलिंडर(दहेज़) ले जाने को वो तैयार हुआ।
यूँ उसका नई मिशाल पेश करने का स्वप्न पूर्ण हुआ।
मन ही मन दहेजी समाज और प्रदूषण को दे रहा दुआ।

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barish

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