छोटी मुसीबत और कर्म
बहुत समय पूर्व की बात है। बहुत बड़ा युद्ध हुआ था। इसमें कई लोगो की जान गयी। इसी में एक सैनिक का कहीं पता न चलने पर सेना ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर जब सैनिक के घर पर उसके माता पिता को मिलती है तो वे बहुत दुखी होते हैं, और रात-दिन रोते रहते हैं इसी प्रकार कई वर्ष बीत जाते हैं।
फिर एक दिन अचानक बेटा उन्हें बताता है कि उसके साथ उसका एक दोस्त भी घर आएगा। माता- पिता कहते हैं - हाँ- हाँ क्यों नही उसे भी जरूर साथ लाना। इस पर बेटा कहता है कि उसका दोस्त हमेशा उसके साथ ही रहेगा। माता - पिता कहते हैं कोई बात नही ले आओ। फिर बेटा बताता है कि उसका दोस्त पूरी तरह से उस पर निर्भर है। वह अपाहिज है और उसके हाथ- पैर नही हैं। इस पर माता-पिता कहते हैं उसका कोई तो होगा उसे उसके पास सौंपकर तुम अकेले आ जाओ। लेकिन बेटा कहता है वह उसे किसी के पास नही छोड़ सकता क्यों कि वह पूरी तरह से उसी पर निर्भर है। माता-पिता बेटे को समझाते हैं दो-चार दिन की बात होती तो कोई बात नही थी पर जीते जी ऐसे इंसान को घर में रखना बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी। पर बेटा कहता है - मैं उसके बिना घर नही आ सकता, वह मेरे बिना मर जायेगा। माता-पिता फिर भी अकेले आने को कहते हैं। तब फोनों का सिलसिला बंद हो जाता है ।
एक दिन अचानक सैनिक के माता - पिता के लिए एक फोन आता है फोन करने वाला व्यक्ति कहता है कि वह उनका बेटा बोल रहा है पहले तो उन्हें यकीन नहीं होता परन्तु उसकी बातों को सुनकर वे यकीन कर लेते हैं। जिससे वे बहुत खुश होते हैं वे उसे मिलना चाहते हैं, फिर फोन पर उनकी बेटे से लगातार बातें होती रहती हैं। वे बेटे से मिलने को कहते हैं उससे उसका पता मांगते हैं तो बेटा कहता है कि वह जल्द ही उनसे मिलने आएगा।
फिर एक दिन अचानक बेटा उन्हें बताता है कि उसके साथ उसका एक दोस्त भी घर आएगा। माता- पिता कहते हैं - हाँ- हाँ क्यों नही उसे भी जरूर साथ लाना। इस पर बेटा कहता है कि उसका दोस्त हमेशा उसके साथ ही रहेगा। माता - पिता कहते हैं कोई बात नही ले आओ। फिर बेटा बताता है कि उसका दोस्त पूरी तरह से उस पर निर्भर है। वह अपाहिज है और उसके हाथ- पैर नही हैं। इस पर माता-पिता कहते हैं उसका कोई तो होगा उसे उसके पास सौंपकर तुम अकेले आ जाओ। लेकिन बेटा कहता है वह उसे किसी के पास नही छोड़ सकता क्यों कि वह पूरी तरह से उसी पर निर्भर है। माता-पिता बेटे को समझाते हैं दो-चार दिन की बात होती तो कोई बात नही थी पर जीते जी ऐसे इंसान को घर में रखना बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी। पर बेटा कहता है - मैं उसके बिना घर नही आ सकता, वह मेरे बिना मर जायेगा। माता-पिता फिर भी अकेले आने को कहते हैं। तब फोनों का सिलसिला बंद हो जाता है ।
फिर कुछ समय बाद माता-पिता को एक पत्र मिलता है जिसमें उनके बेटे की मृत्यु की खबर पढ़कर वे बहुत दुःखी होते हैं। वे जब पत्र में लिखे अस्पताल के पते पर बेटे की लाश लेने जाते हैं तो देखकर स्तब्ध रह जाते हैं। वह बिना हाथ-पैर वाला बेटे का दोस्त नही बल्कि बेटा खुद था। जिसके हाथ-पैर युद्ध में कट गए थे। यह देख कर माता-पिता खुद को बहुत कोसते हैं कि थोड़ी सी मुसीबत से बचने के लिए वे अपने बेटे से भी नही मिल पाये। वे दोनों जीवन भर पश्चाताप की आग में जलते रहते हैं।
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