मेरे सहारे (माता-पिता)

एक उंगली जिसे थामकर, चले ये कदम
एक सहारा जिससे, लड़खड़ाते हुए भी न गिरे हम
एक वाणी कि तुतलाते हुए भी चुप न हुए हम
उसकी ही देन है,  साहस और मेरा ये दम

वह आवाज जो तत्पर है, हर वक्त कुछ सिखाने को
साथी जो हर वक्त साथ है, सुख-दुःख निभाने को
उनकी एक आस ही काफी है, मेरे जीवन में सहारे को
उस उम्मीद की ही जरूरत है, मेरी इस डगर को

मेरी हर कमी में ढूंढी काबिलियत, उन्होंने है
मेरी हर जरूरत का हर वक्त ध्यान जिन्हें है
मेरा हर पल जिनके बिना बेवजह और निराश है
कण- कण जिनके बिना बेजान और उदास है

उनकी बदौलत ही सँवरा मेरा कल और आज
मुझसे ज्यादा वही जानते हैं, मेरे दिल का राज
मेरे इस जीवन के वही खुदा, वही सरताज
मुझे खुदा की इस बेजोड़ देन पर बड़ा है, नाज



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barish

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