मन के भंवर की उड़ान
मेरे मन में दबी इक उड़ान
ऊँची न सही सच्ची थी
जहां की बेड़ियों को तोड़ने की थी
अपना इक जहां रचने की थी
मेरी उड़ान ऊँची न सही
खुले में पंख फड़फड़ाने की थी
कोशिश एक छोटी सी थी
अपना जहां बुनने की
मीठी सी कोशिश थी
मेरे मन में दबी इक उड़ान
उँच्ची न सही सच्ची थी
अपने परों पर उड़ने की थी
खुले आसमां में दम्भ भरने की थी
ऊंचाइयों से दूर तक झाँकने की थी
नील गगन को चूमने की थी
तेज हवाओं से टकराने की थी
मेरे मन में दबी इक उड़ान
ऊँची न सही सच्ची थी.…
ऊँची न सही सच्ची थी
जहां की बेड़ियों को तोड़ने की थी
अपना इक जहां रचने की थी
मेरी उड़ान ऊँची न सही
खुले में पंख फड़फड़ाने की थी
कोशिश एक छोटी सी थी
अपना जहां बुनने की
मीठी सी कोशिश थी
मेरे मन में दबी इक उड़ान
उँच्ची न सही सच्ची थी
अपने परों पर उड़ने की थी
खुले आसमां में दम्भ भरने की थी
ऊंचाइयों से दूर तक झाँकने की थी
नील गगन को चूमने की थी
तेज हवाओं से टकराने की थी
मेरे मन में दबी इक उड़ान
ऊँची न सही सच्ची थी.…
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