पापा
पापा मैंने आपकी लोरी नहीं सुनी
न याद बचपन, न याद दुलार
न याद है डांट, नही मार
न अपनी शरारतें, न आपका प्यार
पर समझ आता है, आपका समर्पण
जानती हूँ जग में बहुत कुछ है, बेहतरीन
पर मेरे लिए आपसे बेहतर नहीं
न आपसे कहा, न कह पाऊँगी
पर आपके कर्ज से न उबर पाऊँगी
चाहे ले लूँ सौ बार जन्म
पर हर बार आपको पिता रूप
में ही मैं पाना चाहूँगी
न याद बचपन, न याद दुलार
न याद है डांट, नही मार
न अपनी शरारतें, न आपका प्यार
पर समझ आता है, आपका समर्पण
जानती हूँ जग में बहुत कुछ है, बेहतरीन
पर मेरे लिए आपसे बेहतर नहीं
न आपसे कहा, न कह पाऊँगी
पर आपके कर्ज से न उबर पाऊँगी
चाहे ले लूँ सौ बार जन्म
पर हर बार आपको पिता रूप
में ही मैं पाना चाहूँगी
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