मेरी पहुंच हो इतनी

ऊँचा उठूँ इतना कि छू लूं आसमां
पर पैर जमीं पर रहें सदा
ना झुके आसमां, ना जमीं उठे
बस मेरी पहुंच इन दोनों तक हो सके
ऊँचा उठूँ इतना कि छू लूं आसमां  

न छूटे आसमां, न जमीं रूठे
पग जमीं की सच्चाई में रहें सदा
आसमां की पहुंच जिंदगी को ऊँचा उठा दे
धरा की अच्छाई महसूस करूँ
आसमां की स्वच्छंदता पा खुश हो सकूँ
ऊँचा उठूँ इतना कि छू लूं आसमां

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barish

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