सुनसान गढ़वाल की पुकार
एक दिन अकेले में बैठी थी सुकून से,
तभी खाली गाँव, पहाड़, बंजर खेत देख।
डर सी गयी।
देखते ही सोचने लगी मै क्या यह स्वप्न है ?
इतना सूनापन क्यों है पहाड़ों मे ?
सोचने लगी।
कुछ पूर्व की बातें, कुछ भविष्य की आसें,
कुछ दर्द सा, कुछ फर्क सा था पहाडों मे।
देखकर काँप गयी।
अरे! कितने सुन्दर जंगल,नदियां,गांव, पहाड़ थे?
हे मानष! तेरे न रहने से सब बंजर हो गए।
यही सोचती हूँ।
नदियों की सॉय -२, गाँवों का सूनापन और
पहाड़ों का खालीपन दर्द को बता रहे हैं।
मैं यही समझती हूँ।
खंडहर घर सभ्यता की कहानी कह रहे।
स्तब्ध गिरिवर दुःख से रो रहे हैं।
हे मनुष्य! कुछ तो समझ ले।
शहरों की भीड़ भरी जिंदगी तूने गले लगा ली।
आज की प्रतिस्पर्धा भरे युग में सोच समझकर फैसला ले।
पहाड़ों के दर्द को समझ
अब भी वक्त है, गाँवों को चल दे।
खुशियों से भरी जिंदगी है यहां पर ।
जरा गौर कर
सुन्दर जगह में ही जिंदगी सुंदर होती।
सुख सुविधा वहीं पहुंचेगी जहाँ तू रहेगा।
अरे मानव! देख ले।
ये धरती अपनी सुंदरता से तुझे आकर्षित करे।
तुझे वापस लौट
ने का बुलावा भेजे।
यही है गढ़वाल की पुकार,
हे मनुष्य! तू जल्दी लौट आ।
चला आ रे चला आ ।
अब और इस गढ़वाल को न रुला ।
अब भी लौट चल वक्त है तेरे पास........
तभी खाली गाँव, पहाड़, बंजर खेत देख।
डर सी गयी।
देखते ही सोचने लगी मै क्या यह स्वप्न है ?
इतना सूनापन क्यों है पहाड़ों मे ?
सोचने लगी।
कुछ पूर्व की बातें, कुछ भविष्य की आसें,
कुछ दर्द सा, कुछ फर्क सा था पहाडों मे।
देखकर काँप गयी।
अरे! कितने सुन्दर जंगल,नदियां,गांव, पहाड़ थे?
हे मानष! तेरे न रहने से सब बंजर हो गए।
यही सोचती हूँ।
नदियों की सॉय -२, गाँवों का सूनापन और
पहाड़ों का खालीपन दर्द को बता रहे हैं।
मैं यही समझती हूँ।
खंडहर घर सभ्यता की कहानी कह रहे।
स्तब्ध गिरिवर दुःख से रो रहे हैं।
हे मनुष्य! कुछ तो समझ ले।
शहरों की भीड़ भरी जिंदगी तूने गले लगा ली।
आज की प्रतिस्पर्धा भरे युग में सोच समझकर फैसला ले।
पहाड़ों के दर्द को समझ
अब भी वक्त है, गाँवों को चल दे।
खुशियों से भरी जिंदगी है यहां पर ।
जरा गौर कर
सुन्दर जगह में ही जिंदगी सुंदर होती।
सुख सुविधा वहीं पहुंचेगी जहाँ तू रहेगा।
अरे मानव! देख ले।
ये धरती अपनी सुंदरता से तुझे आकर्षित करे।
तुझे वापस लौट
ने का बुलावा भेजे।यही है गढ़वाल की पुकार,
हे मनुष्य! तू जल्दी लौट आ।
चला आ रे चला आ ।
अब और इस गढ़वाल को न रुला ।
अब भी लौट चल वक्त है तेरे पास........
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