मन बड़ा चंचल

मानव मन बड़ा चंचल ,
चपल और बेचैन |
क्षण-क्षण में मीलों दूर
पल-पल इधर- उधर |
डगर-डगर ढूंढे कुछ नया
पावन सुंदर न जाने क्या-२?
मन की गति अति तेज
क्षण में स्वर्ण सेज |
क्षण में काँटों की सेज
मानव मन अति चंचल|
मन मति समझ पाना
अति विरल |
कब कहाँ हो मन
समझ सके न मानव |

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

barish

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है