नै पछ्याण

इथै फुंड के लोग जरसी सिथै फुंड क्या जाते हैं ?
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

ब्वै ब्वाद खबरदार मिखुनी मम्मी बोलो तुम !
जब भी बच्याणु हो हिंदी में गिचु खोलो तुम |
न हिंदी सी, न गढ़वली सी बस खिचड़ी पकाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

नौनु ब्वाद मम्मी इस्कोल में कनक्वेकी जाऊँ मैं ?
होमवर्क के बदले में टीचर थै क्या बताऊँ मैं ?
तेरी रैंदी शान चबोड़ी, बच्चे हमथै चिढ़ाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

हे भुली ! आज तूने क्यांकू साग बनाया है ?
अपखुणै त मैंने चटनी आर ढबण्या रुटि बनाया है |
मेरे बच्चे त इनि ऊनि चीज़ नही खाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

यख आके मेरे बच्चे भन्ड्या ही बिगड़  गये |
मूला, परमला, इस्कोस  सब भितर ही सड़ गये |
तिन्नी बेलि बस मैगी, चाऊमिन ही खाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

घार रैकी भुली मैंने खैरी भन्ड्या खायी है |
घास, लखड़ू, खेती - बाड़ी, गौड़ी, भैंसी भी पिजाई है |
यख आके मीथै अपने पुराने दिन याद आते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

यख आके भुली मैं भन्ड्या अलगसी हो गयी हूँ
भ्याल भ्यटकों जाती थी, अब कुवंसी हो गयी हूँ |
इनके डैडी भी मीथै बहुत दलकाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

वख तो कौथिग कभी साल भर में उरेते हैं |
यख तो व्यखुनी फजल उरेते ही रहते हैं |
वख कभी -२ यख सदनि दूध जलेबी खाते हैं |
गढ़वली थै छोड़ि बस अधकचि हिंदी में बच्याते हैं |

कुसंगति कु असर दिदों कतगा जल्दी प्वड़दा ?
बुरे अपणु असर देखो कतगा जल्दी छ्वड्दा ?
यूँ की छ्वीं लगांद मी भी देशी रौं न पहाड़ी सी |
बणीकी रैग्यों मी भी भयों गंजगंजी बाड़ी सी |

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barish

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