स्टूडेंट महोदय जी

प्रातः समय फैशन में बिता दोपहर पिक्चर हॉल में,
शाम का समयबाज़ार में बीता रात का सोने में |
पढ़ना लिखना छोड़ दिया ह लिखूँ क्या इम्तहान में,
होश सम्भाल कर फिर सोचा परसों तो इम्तहान है |
परीक्षा मे जब बैठा तो निरीक्षक से विनती की,


सर गणित का पेपर क्यों बाँट रहे हैं, आज तो हिंदी है?
निरीक्षक महोदय चढ़कर बोले होश में आकर बोल |
हिंदी का ही तो पेपर है , विषय गणित का क्यों भरा ?
शर्म के मारे मुँह छुपाकर, घर के अँधेरे कोने में,
आंसू से ही प्यास बुझाई, टपके थे जो रोने में |
आओ साथियों तुम्हे बताएं हालत आज के स्टूडेंट की,



चमक दमक है कपड़ों में, सुन्दर सी खुशबु सेंट की |
हजार रूपये फीस पड़ती है, मांगते हैं दो हजार रूपये|
गली गली और होटलों में खूब मौज़ ये मनाते |
दो पन्ने जेब में रखकर कॉलेज को आ जाते ,
गर मिल गया कोई दोस्त तो क्लासें गोल कर जाते |

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barish

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